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गुरुकुल की स्थापना व्यावसायिक दृष्टिकोण से नहीं अपितु एक सामाजिक नैतिक ध्येय से की गयी है ! यह ध्येय है- प्रतिब्धता,संवेदनशील और रचनात्मक प्रशासको की प्राप्ति !

निजी और विशेषकर सार्वजानिक क्षेत्र मैं मैनें अनुभव किया है की हमारे समाज मैं कार्य-संस्कृति का अभाव है,विशेषकर सरकारी सेवा को अकर्न्यता,संवाद हीनता और संवेदनहीनता ,अनेतिकता आदि ने जकड रखा है! वस्तुतः समाज की विभिन्न संस्थाए अपना योगदान नकारात्मक दिशा में ले जा रही है जिनमे शिक्षण संस्थाओ का उत्तरदायित्व सर्वाधिक है!

शिक्षा,स्वास्थ्य में जैसे घोर व्यवसायिकता आ गयी है जबकि समाज में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए प्राचीन समय में इन क्षेत्रो को "सेवा" मात्र का स्वरूप दिया गया था !

शिक्षा का सम्बन्ध संस्कार और संस्कृति से प्रत्यक्ष और गहनतम होता है ! आज यह सम्बन्ध बदल चूका है! व्यावसायिक लाभ के कारन ही भारत के गली मोहल्लो में कोचिंग ,निजी स्कूल,महाविद्यालय आड़ कुकुरमुत्ते की भांति उग आये है !इनमें से अधिकांश का उद्देश्य "विद्यार्थी हित" नहीं अपितु "स्वहित" है !

सिविल सर्विसेस,रेलवे,पुलिस,बैंक आड़ आम जनता से सम्बंधित सार्वजानिक सेवाओ के लिए को कोचिंग संसथान संचालित है,उन्होंने व्यावसायिक दृष्टिकोण के कारण यह सामाजिक दायित्व भुला किया की परीक्षा-प्रशिक्षण का अभिन्न अंग प्रतियोगीयो में मानवीयता का विकास भी है और इसीलिए उनके परिणाम वास्तविक रूप से कहे तो दस फीसदी के करीब भी नहीं पहुचते !

वस्तुतः लोक सेवा परीक्षाओ का उद्देश्य होता है सामाजिक रूप से चिन्तनशील प्रशासको की भरती ! मुक्य परीक्षा और साक्षात्कार के जरिये इस दृष्टिकोण का आकलन किया जाता है ! इसीलिए कोचिंग के लेक्चर्स,स्टडी मटेरिअल की दिशा सामाजिक दशा के अनुरूप होनी चाहिए, तभी परिणाम ६०-७० प्रतिशत तक पहुँच सकता है, जैसा की गुरुकुल ने मात्र छह वर्षो में ही स्थापित कर दिखाया है !

यही समाज में व्याप्त असमानता को आप उलट देंना चाहते है,प्रत्येक क्यक्ति के दर्द को अपने में महसूस करना चाहते हेया,भारतीय संस्कृति के ,अहिंसा,त्याग,बलिदान,सर्वधर्म,समभाव,साहिशुनता,उदारता जैसे आभुशनो को धारण करने में गौरव महसूस करते है और इन सबके लिए आप समाज में व्याप्त जड़ता से विवेकपूर्ण ढंग से निपटना चाहते है तो ही आप गुरुकुल को अपना बनाये !

गुरुकुल(माहेश्वरी) आई.सी.एस. द्वारा विगत ८ वर्षो से भी अधिक समय से संघ और राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा हेतु प्रभावी ढंग से कोचिंग उपलब्ध करायी जाती है ! अंबिकापुर (1999) से शुरुआत करने के बाद गुर्कुकुल की वर्तमान में इंदौर और बिलासपुर में दो मुख्य शाखाएं तथा भोपाल में एक अस्थायी शाखा कार्यरत है ! संस्था ने गुरुकुल पद्धति से अल्प समय में ही १५०० से अधिक प्रमाणिक चयन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मार्गदर्शन में सुनिशिश्चित किये है ! भारत की ७२ प्रतिशत से अधिक आबादी गावों में निवास करती है ! फिर भी प्रशासनिक तथा अन्य सेवाओं में ग्रामीण क्षेत्र के चयन १० प्रतिशत से भी कम है !वस्तुतः संसाधन और सुचना आधारित युग में ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाये पिछड जाती है !इसीलिए गुरुकुल के ग्रामीण केन्द्रों की स्थापना का संकल्प हमने लिया है ! यहाँ पुर्णतः निःशुल्क शिक्षा तथा आवास आड़ सुविधाए मुहैया करायी जाएगी !२०१० में बागली में स्थापित गुरुकुल से इसकी शुरुआत कर दी गयी है !

इस व्यवसायिक दौर में शिक्षा को व्यवसायिकता से दूर ले जाने के लिए हमें प्रारम्भिक रूप से कतिपय व्यवसायिक तरीके जैसे विज्ञापन आदि का सहारा लेना पद रहा है ! इसके लिए हम ईश्वर और समाज दोनों से क्षमा याचना करते है ! गुरुकुल द्वारा प्रकाशित नोट्स छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की राज्य सेवाओ के सर्वाधिक विद्यार्थीयो द्वारा पड़े जाते है !संघ लोक सेवा आयोग के लिए भी विगत तीन वर्षो से हमने मध्य भारत से श्रेष्ठ चयन दिए है जिनमे मनोज शर्मा (AIR -16).चंद्रशेखर सोलंकी (IPS),2008 में चयनित आशीष डहरिया,2009 में चयनित युसूफ कुरैशी के नाम उल्लेखनीय है !